By रेनू तिवारी | Aug 21, 2026
यदि आप सिनेमाघरों में ऐसी फ़िल्में देखना पसंद करते हैं जो बिना समय गंवाए सीधे आपको रोंगटे खड़े कर देने वाले एड्रेनालाईन-पंपिंग (Adrenaline-Pumping) एक्शन में झोंक देती हैं, तो '7 Dogs' आपके लिए ही बनी है। 'बैड बॉयज़ फॉर लाइफ' और 'बैड बॉयज़: राइड ऑर डाई' जैसी सुपरहिट फ़िल्में देने वाले मशहूर डायरेक्टर द्वय आदिल अल अरबी और बिलाल फल्लाह ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि एक्शन को स्क्रीन पर एंटरटेनमेंट की तरह कैसे पेश किया जाता है। यह फ़िल्म शुरुआत से अंत तक एक ही नियम पर चलती है: 'बस आगे बढ़ते रहो!'
फ़िल्म का ओपनिंग सीन ही इसकी आगे की रफ़्तार तय कर देता है। एक मिडल-एयर क्रैश होते हवाई जहाज़ के भीतर जबरदस्त गनफ़ाइट और स्टंट्स होते हैं, जिसे किसी तरह दो लोग बचाते हैं। पहला है खालिद अल-अज़ाज़ी (अहमद एज़), जो एक बेहद काबिल इंटरपोल अफ़सर है। दूसरा है घाली अबू दाऊद (करीम अब्देल अज़ीज़), जो एक खूंखार क्रिमिनल है और 'सेवन डॉग्स' नाम के खतरनाक इंटरनेशनल सिंडिकेट का मुख्य सदस्य है।
खालिद अब फील्ड वर्क छोड़कर अपनी मंगेतर के साथ एक शांत शादीशुदा जिंदगी बिताना चाहता है। लेकिन उसकी यह योजना तब ध्वस्त हो जाती है जब 'पिंक लेडी' नाम का एक नया, घातक ड्रग पूरी दुनिया के क्राइम नेटवर्क में तहलका मचा देता है। सिंडिकेट को खत्म करने के लिए खालिद को एक आखिरी मिशन पर लौटना पड़ता है। सबसे बड़ा ट्विस्ट यह है कि उसे अपने पुराने दुश्मन और अपराधी घाली के साथ ही हाथ मिलाना पड़ता है।
ग्लोबल स्टेज पर मौत का पीछा और चाइनीज़ टच
फ़िल्म की सबसे बड़ी खूबी इसका दायरा (Scale) है। सिंडिकेट के सात प्रमुख सदस्य दुनिया के अलग-अलग देशों में छिपे हैं, जिससे यह पूरा मिशन एक 'ग्लोबल कैट-एंड-माउस चेस' बन जाता है। हर नई लोकेशन के साथ एक्शन का स्टाइल भी बदलता है।
चाइनीज़ सीक्वेंस: चीन वाला हिस्सा, जिसमें ली चांग (मैक्स हुआंग) का किरदार है, फ़िल्म को एक नए मुकाम पर ले जाता है। इस बैकग्राउंड में प्रिसिला चैन का मशहूर कैंटोनीज़ गाना 'अ थाउज़ेंड क्यू सॉन्ग्स' बजता है। कोरियोग्राफी इतनी शानदार और ऊर्जावान है कि यह भयंकर खून-खराबे के बीच भी एक गजब का मजेदार टच देती है।
भारतीय दर्शकों के लिए धमाका: सलमान खान और संजय दत्त
भारतीय फैंस के लिए फ़िल्म का सबसे बड़ा आकर्षण सलमान खान और संजय दत्त का कैमियो है। भले ही उनका स्क्रीन टाइम अपेक्षा से कम है, लेकिन वे जब भी स्क्रीन पर आते हैं, पूरी लाइमलाइट चुरा लेते हैं।
सलमान खान (जौहर): खालिद के बेहद करीबी और वफादार सहयोगी 'जौहर' के रोल में सलमान अपने खास अंदाज़ और स्वैग में नजर आते हैं। उन्हें न सिर्फ भारी-भरकम गन-फाइट का मौका मिला है, बल्कि ऑटो-रिक्शा के साथ एक बेहद मजेदार एक्शन-राइड भी दी गई है जो भारतीय फैंस को सीट से बांधे रखती है।
संजय दत्त (रंजीत): भारत वाले सीन में संजय दत्त एक खूंखार अपराधी 'रंजीत' के अवतार में दिखते हैं। मेकर्स ने उन्हें पारंपरिक विलेन की जगह एक अनूठा अंदाज़ दिया है—वह भीषण लड़ाई के दौरान भी एक हाथ में 'सेल्फी स्टिक' पर कैमरा पकड़े ब्लॉगर की तरह लड़ते दिखते हैं। यह सीन अजीब, नया और बेहद मनोरंजक है।
महिला किरदारों का एक्शन अवतार और मोनिका बेलुची की शालीनता
लास वेगास और रेगिस्तानी लोकेशन्स के दौरान एंट्री होती है जूलिया यानी मोनिका बेलुची की। मोनिका इस तेज़-तर्रार फिल्म में अपनी मौजूदगी से एक डार्क, शालीन और खतरनाक वाइब जोड़ती हैं।
इस फिल्म की एक और तारीफ करनी होगी कि यह महिला किरदारों को केवल 'ग्लैमर' या 'भावनात्मक सपोर्ट' तक सीमित नहीं रखती। खालिद की महिला सहकर्मियों को भी पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर घातक एक्शन सीन्स और गन-फाइट में हिस्सा लेते दिखाया गया है।
कॉमेडी, परिवार और रफ़्तार का समझौता
फ़िल्म केवल गोलियों की गूंज तक सीमित रहने की कोशिश नहीं करती। इसमें खालिद का अपनी मंगेतर के साथ रिश्ता, उसके पिता की मौत का अतीत और घाली के परिवार का भावनात्मक पक्ष भी जोड़ा गया है। एक बेहद उथल-पुथल भरे एक्शन सीन के बीच खालिद को उसकी मंगेतर का कॉल आना—जो इस बात से बेखबर है कि वह अपनी जान बचा रहा है और उससे शादी की लोकेशन तय करने को कह रही है—फ़िल्म में कॉमेडी का एक बहुत प्यारा एंगल लाता है।
हालांकि, भावनात्मक पहलू फ़िल्म का सबसे कमजोर हिस्सा है। कहानी इतनी तेजी से आगे बढ़ती है कि दर्शकों को किसी भी रिश्ते की गहराई को महसूस करने का मौका ही नहीं मिलता।
अंतिम फैसला (Verdict)
रेगिस्तान के बीच धूल भरी आंधियों, आग के गोलों और धमाकों से भरा इसका क्लाइमैक्स (Climax) बड़े पर्दे पर देखने लायक है। '7 Dogs' कोई ऐसी फिल्म नहीं है जिसके बारे में आप हफ्तों तक सोचते रहें, लेकिन सिनेमाघर के अंदर बिताए गए दो घंटे में यह आपको एक पल के लिए भी बोर नहीं होने देती। सलमान और संजय का ज्यादा स्क्रीन टाइम न होना थोड़ा खटक सकता है, लेकिन अगर आप एक शुद्ध, बिना रुके चलने वाले और हाई-ऑक्टेन 'मास एक्शन एंटरटेनर' की तलाश में हैं, तो यह फ़िल्म आपको निराश नहीं करेगी।